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हिन्दी शायरी – दिल को छू लेने वाली हिंदी शायरी

दीक्षा ठाकुर की दिल छू लेने वाली शायरी

कहते हैं रिश्तों में लफ्जों की जरूरत होती है
पर कुछ बेजुबान अपनी खामोशियों से,
ऐसी बड़ी बातें कह जाते हैं
जो लफ़्ज इज़हार नहीं कर पाते।

कभी-कभी किसी का इंतजार भी 
इतना इंतजार करवाता है 
कि हम इंतजार करते रह जाते हैं 
और वह इंतजार कभी खत्म नहीं होता।

उम्मीद में चलती हूं रोज़
ये सोचकर की पहुंच जाऊंगी मैं वहीं
जहां अब पहुंचने की उम्मीद ही नहीं।

मैं भी मुसाफिर हूं यारों
अपने आप की तलाश में निकली हुं
क्या यही हुं मैं?
इस सवाल का जवाब ढूंढने निकली हुं।

दर्द चाहे कितना भी बड़ा क्यों ना हो
अगर उसे बांटने वाला कोई हो
तो दर्द खत्म तो नहीं पर कम जरूर हो जाता है।

रोज़ निकल पड़ती हुं जिंदगी के नए सफ़र पर 
यह सोचकर कि कहीं पुरानी यादों से सामना ना हो जाए ।

ये रात आती है
तो तेरा जिक्र साथ लाती है।
मैं चाहूं ना चाहूं
ये लफ्जों की महफ़िल खुद सजाती है
गुजरती हवा से पुछती है तेरा हाल
उस खामोशी का शायद इसे अब भी है मलाल

जिन्दगी से रूठी थी की मंजिलों का पता नहीं
तुमसे इसकदर प्यार था, कि तुम बिन जीने का कोई ढंग नहीं
बारिशों के इस मौसम में, हवाओं का कोई रूख़ नहीं
जीने की एक ख्वाहिश थी मगर जीने का कोई ढंग नहीं

किस हद तक जाना है यह कौन जानता है,
किस मंजिल को पाना है यह कौन जानता है,
दोस्ती के दो पल जी भर के जी लो ,
किस रोज़ बिछड़ जाना है यह कौन जानता है।

शायर – दीक्षा ठाकुर

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